मुख्य सामग्री पर जाएँ
UmrahGuide

أدعية العمرة

उमरा की दुआएँ

एहराम से बाल कटवाने तक हर दुआ, अरबी पाठ, उच्चारण, अर्थ और स्रोत के साथ। जहाँ कोई तय शब्द नहीं, वहाँ अपने शब्दों और अपनी भाषा में दुआ करें।

एहराम

तल्बिया
सुन्नत

لَبَّيْكَ اللّٰهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ

Labbayk Allāhumma labbayk, labbayka lā sharīka laka labbayk. Innal-ḥamda wan-ni'mata laka wal-mulk, lā sharīka lak.

मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह, मैं हाज़िर हूँ। मैं हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, मैं हाज़िर हूँ। बेशक सारी तारीफ़, नेमत और बादशाहत तेरी ही है। तेरा कोई शरीक नहीं।

उमरा की नीयत के बाद, और तवाफ़ शुरू होने तक बार-बार। मर्द ऊँची आवाज़ में, औरतें धीमी आवाज़ में।

Sahih al-Bukhari 1549; Sahih Muslim 1184

उमरा की नीयत
सुन्नत

لَبَّيْكَ عُمْرَةً

Labbayka ʿumrah.

मैं हाज़िर हूँ [ऐ अल्लाह] उमरा के लिए।

मीक़ात पर, दिल में। इन शब्दों को ज़बान से कहना आम रिवाज है।

Sahih Muslim 1232

एहराम पहनते वक़्त
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, इस एहराम को मेरे लिए आसान कर दे और मुझे हर उस चीज़ से बचा जो इसे तोड़ दे।”

निजी दुआ; किसी भी भाषा में करें।

हरम पहुँचना

मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त
सुन्नत

بِسْمِ اللّٰهِ، وَالصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللّٰهِ، اللّٰهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

Bismillāh, waṣ-ṣalātu was-salāmu 'alā Rasūlillāh. Allāhummaftaḥ lī abwāba raḥmatik.

अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद और सलाम। ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

दायाँ पैर पहले रखें, मस्जिद अल-हराम हो या कोई भी मस्जिद।

Sahih Muslim 713; Sunan Ibn Majah 771

मक्का में दाख़िला
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, यह तेरा हरम और तेरी अमान की जगह है, तो मुझे जहन्नम से और उस दिन के अज़ाब से बचा जिस दिन तू अपने बंदों को उठाएगा, और मुझे अपने दोस्तों और फ़रमाँबरदारों में शामिल कर।”

पाक शहर पहुँचते वक़्त।

काबा पर पहली नज़र
रिवायत

اللّٰهُمَّ زِدْ هٰذَا الْبَيْتَ تَشْرِيفًا وَتَعْظِيمًا وَتَكْرِيمًا وَمَهَابَةً، وَزِدْ مَنْ شَرَّفَهُ وَكَرَّمَهُ مِمَّنْ حَجَّهُ أَوِ اعْتَمَرَهُ تَشْرِيفًا وَتَكْرِيمًا وَتَعْظِيمًا وَبِرًّا

Allāhumma zid hādhal-bayta tashrīfan wa ta'ẓīman wa takrīman wa mahābah, wa zid man sharrafahu wa karramahu mimman ḥajjahu awi'tamarahu tashrīfan wa takrīman wa ta'ẓīman wa birrā.

ऐ अल्लाह, इस घर की इज़्ज़त, अज़मत, तकरीम और हैबत बढ़ा दे, और हज या उमरा करने वालों में से जो इसकी ताज़ीम और तकरीम करे, उसकी इज़्ज़त, तकरीम, अज़मत और नेकी बढ़ा दे।

हाथ उठाकर अल्लाह से जो चाहें माँगें। ये शब्द पहले के बुज़ुर्गों से मनक़ूल हैं।

Reported by al-Shafiʿi in al-Umm and al-Bayhaqi; its chain is considered weak

तवाफ़

हज्र-ए-असवद पर
सुन्नत

بِسْمِ اللّٰهِ، وَاللّٰهُ أَكْبَرُ

Bismillāhi, wallāhu akbar.

अल्लाह के नाम से, और अल्लाह सबसे बड़ा है।

हर चक्कर की शुरुआत में। मुमकिन हो तो छुएँ या चूमें; वरना दायाँ हाथ उसकी ओर उठाएँ।

Sahih al-Bukhari 1613 (takbir); al-Bayhaqi 5/79

तवाफ़ की शुरुआत
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, मैं तेरी रहमत, मग़फ़िरत और क़ुबूलियत की उम्मीद में यह तवाफ़ शुरू करता हूँ।”

हर चक्कर की कोई तय दुआ नहीं। अपनी भाषा में अल्लाह से बात करें।

रुक्न-ए-यमानी और हज्र-ए-असवद के बीच
क़ुरआन

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

Rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanah, wa fil-ākhirati ḥasanah, wa qinā 'adhāban-nār.

ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

हर चक्कर में, दोनों कोनों के बीच के हिस्से में।

Quran 2:201; Sunan Abi Dawud 1892

मक़ाम-ए-इब्राहीम पर
क़ुरआन

وَاتَّخِذُوا مِن مَّقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى

Wattakhidhū min maqāmi Ibrāhīma muṣallā.

और मक़ाम-ए-इब्राहीम को नमाज़ की जगह बनाओ।

सातवें चक्कर के बाद, मक़ाम के पीछे दो रकअत से पहले, या भीड़ हो तो मस्जिद में कहीं भी।

Quran 2:125; Sahih Muslim 1218

ज़मज़म पीते वक़्त
रिवायत

اللّٰهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا وَاسِعًا، وَشِفَاءً مِنْ كُلِّ دَاءٍ

Allāhumma innī as'aluka 'ilman nāfi'an, wa rizqan wāsi'an, wa shifā'an min kulli dā'.

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे फ़ायदेमंद इल्म, कुशादा रिज़्क़ और हर बीमारी से शिफ़ा माँगता हूँ।

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “ज़मज़म उसी मक़सद के लिए है जिसके लिए पिया जाए।” जो ज़रूरत हो माँगें।

Sunan Ibn Majah 3062 (hadith); the dua is reported from Ibn ʿAbbas (al-Daraqutni)

सई

सफ़ा के क़रीब पहुँचकर
क़ुरआन

إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللّٰهِ

Innaṣ-Ṣafā wal-Marwata min sha'ā'irillāh.

बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं।

एक बार, सई की बिल्कुल शुरुआत में सफ़ा के क़रीब पहुँचते हुए।

Quran 2:158; Sahih Muslim 1218

सफ़ा और मरवा पर
सुन्नत

اللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ. لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ، أَنْجَزَ وَعْدَهُ، وَنَصَرَ عَبْدَهُ، وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ

Allāhu akbar (×3). Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa huwa 'alā kulli shay'in qadīr. Lā ilāha illallāhu waḥdah, anjaza wa'dah, wa naṣara 'abdah, wa hazamal-aḥzāba waḥdah.

अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तारीफ़ है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है। उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले सब लश्करों को हराया।

काबा की ओर रुख़ करें, हाथ उठाएँ, और यह तीन बार पढ़ें, बीच में अपनी दुआएँ करें। मरवा पर भी यही करें।

Sahih Muslim 1218

सई पूरी होने पर
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, मेरी सई क़ुबूल कर और मेरे गुनाह माफ़ कर।”

मरवा पर, सातवें चक्कर के बाद।

समापन

उमरा पूरा होने पर
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, मुझसे यह उमरा क़ुबूल कर, मेरे गुनाह माफ़ कर, और मुझे वह अज्र दे जिसका तूने अपने नेक बंदों से वादा किया है।”

बाल मुंडवाने या कटवाने के बाद।