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UmrahGuide

चार अरकान · 03

तीसरा क़दम: सई

सफ़ा से शुरू करके सफ़ा और मरवा के बीच सात चक्कर, सुन्नत ज़िक्र और चलने के व्यावहारिक सुझावों के साथ।

अपडेट 23 अक्टूबर 2026ड्राफ़्ट: समीक्षा बाक़ी1 मिनट पढ़ाई

सई हज़रत हाजरा की याद है, जब वे अपने बेटे इस्माईल के लिए सफ़ा और मरवा की पहाड़ियों के बीच पानी ढूँढ रही थीं। आज यह रास्ता मस्जिद के अंदर एक लंबी, एयर कंडीशंड गैलरी है, हर तरफ़ लगभग 450 मीटर।

सई का तरीक़ा

  1. सफ़ा की ओर जाएँ

    तवाफ़ और ज़मज़म के बाद सफ़ा के निशान देखें। क़रीब पहुँचकर एक बार आयत पढ़ें।
  2. काबा की ओर रुख़ करके दुआ

    सफ़ा पर थोड़ा ऊपर चढ़ें, काबा की ओर रुख़ करें, हाथ उठाएँ, और ज़िक्र तीन बार पढ़ें, बीच में अपनी दुआएँ करें।
  3. मरवा की ओर चलें

    मरवा की ओर चलें। दो हरे निशानों के बीच मर्द हल्का दौड़ें; औरतें आम रफ़्तार से चलें।
  4. मरवा पर दोहराएँ

    मरवा पर काबा की ओर रुख़ करके वही करें जो सफ़ा पर किया।
  5. सात चक्कर

    सफ़ा से मरवा एक, मरवा से सफ़ा दो, इसी तरह। सातवाँ चक्कर मरवा पर ख़त्म होता है।
सफ़ा के क़रीब पहुँचकर
क़ुरआन

إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللّٰهِ

Innaṣ-Ṣafā wal-Marwata min sha'ā'irillāh.

बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं।

एक बार, सई की बिल्कुल शुरुआत में सफ़ा के क़रीब पहुँचते हुए।

Quran 2:158; Sahih Muslim 1218

सफ़ा और मरवा पर
सुन्नत

اللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ. لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ، أَنْجَزَ وَعْدَهُ، وَنَصَرَ عَبْدَهُ، وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ

Allāhu akbar (×3). Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa huwa 'alā kulli shay'in qadīr. Lā ilāha illallāhu waḥdah, anjaza wa'dah, wa naṣara 'abdah, wa hazamal-aḥzāba waḥdah.

अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तारीफ़ है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है। उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले सब लश्करों को हराया।

काबा की ओर रुख़ करें, हाथ उठाएँ, और यह तीन बार पढ़ें, बीच में अपनी दुआएँ करें। मरवा पर भी यही करें।

Sahih Muslim 1218

चलते हुए कोई भी ज़िक्र या दुआ करें: सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर, ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह, या अपने शब्दों में।

सई पूरी होने पर
अपने शब्दों में

“ऐ अल्लाह, मेरी सई क़ुबूल कर और मेरे गुनाह माफ़ कर।”

मरवा पर, सातवें चक्कर के बाद।